बात निकली है तो दूर तलक जायेगी। ये बात की फितरत है !!! बस बात निकले...हम यही चाहते हैं । इसीलिए हम, आप और वे सब यहाँ आये हैं।
बात में ही सत्य है बात में ही अंत है। बात ही प्रगति है बात है संधान है।
यहाँ बात, विचार, बोल, कविता, गीत, गद्य सब के लिए समान स्थान है
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